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Thursday, 9 July 2020

भींगते नयन


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अश्क़ में भीगते नयन मेरे,
कह रहे हैं तू रोक मुझे।
मदहोश ना हो उनकी आंखों में,
जो बात किसी की और कहे।

अंबर भी झुठले होंगे अब,
बिन बदरा जो बरस पड़े।
वह मीठी सी भीगी यादों को,
जब पुलकित नयना तरस पड़े।
मदहोश ना हो उनकी आंखों में,
जो बात किसी की और कहे।

अश्कों का समुंदर बन बैठा,
हर बूंद में अपनी बात भरे।
जब-जब बे-मौसम बदली है वो,
यह बिन बात कहे ही छलक पड़े।
मदहोश न हो उनकी आंखों में,
जो बात किसी की और कहे।

उसकी हर रुसवाई में,
आहट सी उसकी परछाई से।
सुनने को उसकी बातों को,
मेरे लफ्ज़ यूं ही बोल पड़े।
मदहोश ना हो उनकी आंखों में,
जो बात किसी की और कहे।

© सतीश कुमार सोनी 
जैतहरी जिला अनूपपुर (म० प्र०)

Friday, 15 May 2020

चलो कुछ लिखते हैं : सतीश कुमार सोनी


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                           चलो कुछ लिखते है


आज मैं मन के ख्वाब लिखूँ,
या लिख दूं कोई ऐसा गीत। 
हो चित्त प्रसन्न सबका यह मन,
शब्द ना करे भयभीत। 

शब्द करें मेरे दिल की बात,
हो कुछ इसका ऐसा अंदाज। 
करे मंत्रमुद्ध और विवश पठन को,
हर पंक्ति कहे कविता का राज। 

प्रेम विरग, श्रंगार मिला दूं,
या घोल दूं कोई ऐसा राग। 
मिल सब कोई बात सिखा दे,
हो जाये इससे अनुराग। 

शब्द-शब्द में यश हो ऐसा,
संत की वाणी में मधुरस जैसा। 
सभी के मन को तृप्त करे यह, 
चाहे व्यक्ति हो कैसा। 

चिंतन को मजबूर करा दे,
लेखक के भावों को बतलादे। 
दे जाये कोई सीख जरा सी,
शब्दो की महिमा को समझादे।

अंत सुशोभित हो इसका,
सबके मन में घर कर जाये। 
हो कुछ ऐसी बात भी इसमें,
ना पढने वाला भी पढ जाये । 


© सतीश कुमार सोनी
जैतहरी, जिला-अनूपपुर (म्‍0प्र0)


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Wednesday, 13 May 2020

मै मजदूर हूं: सतीश कुमार सोनी



                                    मै मजदूर हूं

देश की मैं नींव हूं,
सबसे बड़ा गरीब हूं।
दो जून की रोटी की खातिर,
घर छोड़ने को मजबूर हूं।
क्योंकि मैं मजदूर हूं।..-2

पसीने से सींच कर,
मैंने करोड़ो महल बनाए।
जब आयी मुसीबत मुझ पर,
तो महलों के ही मालिक न अपनाएं।

धूप पसीने से मैंने,
खुद को जला डाला।
तब जाकर बच्चों की खातिर,
मैं ला पाया एक निवाला।
इस पेट की खातिर सब सहने को मजबूर हूं,
क्योंकि मैं मजदूर हूं।...-2

महलों के जो बन बैठे मालिक,
हवाई यात्रा कर रहे।
और हम घर जाने की खातिर,
पैदल चलते-चलते मर रहे।
चलते चलते पैरों में मोटे छाले पड़ गए,
कुछ ने तो देखा साहब, 
कुछ देखकर भी निकल गए।

झूठे यह सरकारी पुतले,
ना जाने क्या क्या कह गए।
भोजन देने की आड़ में,
हमारा मजाक बना कर चले गए।
इस भूख और लाचारी में, फोटो खिंचाने को मजबूर हूं।
क्योंकि मैं मजदूर हूं।। क्योंकि मैं मजदूर हूं।।

©सतीश कुमार सोनी।
जैतहरी, जिला - अनूपपुर (म०प्र०)

Friday, 1 May 2020

कोरोना- आज और कल: सतीश कुमार सोनी

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देश दुनिया की ये लाचारी,
बनकर आयी कोरोना महामारी। 
हसते हुए इस विश्व जगत को,
सहमा गयी है यह बीमारी। 


मानव से यह प्रकृति त्रस्त है,
कोरोना, प्रकृति का ही मूक अस्त्र है। 
अब होते परेशान भला क्यों,
जब सब अपने में ही मदमस्त है। 

कोरोना की यह समस्या बडी है,
लोगो को जैसे लग गयी हथकड़ी है। 
प्रकृति की भी मार अजब है,
सारी कयासें धरी पड़ी है। 

जब से यह बीमारी ( कोरोना पॉजिटिव संख्या ) बढ़ी है,
आर्थिक मंदी बडी चढ़ी है। 
कैसे अब संभलेगा भारत,
सामने यह चुनौती खड़ी है। 

कुछ, कोरोना की भी है बात निराली,
इसने फिर से ला दी है हरियाली। 
दिखलाया हिमालय कम करके प्रदूषण,
और हर घर में दिखी एकता की दीवाली।

यह धुंआ और कचरा जो सबके इर्द-गिर्द है,
किया है साफ और ओजोन का भर दिया छिद्र है। 
दुनिया को एक नया पाठ सिखाने,
आया प्रकृति का कोई इष्ट मित्र है। 

प्रकृति प्रेम और प्रकृति समपर्ण,
नहीं काम के ये धन-आभूषण। 
इस धरा को निर्मल स्वच्छ बनाने,
अपना कर दे तू सबकुछ अपर्ण। 

और अब बस आस कर तू प्रयास तू,
दूर-दूर रहकर ही बात कर तू। 
सब बदलेगा पर समय लगेगा,
जीवन पर विश्वाश रख तू, जीवन पर विश्वाश रख तू। 

रचना-   सतीश  कुमार सोनी 
     
        जैतहरी, जिला-अनूपपुर (म० प्र०)      

  

Monday, 27 April 2020

सिपाही - सतीश कुमार सोनी

                                                               
                                 कविता - सिपाही 


इस देश और दुनिया में जब भी होती दिखे तबाही,
रोम रोम कहता है मेरा मैं भी बन जाऊं सिपाही।
कितने वीर सपूतों ने आजादी हमें दिलानी चाही,
इन्हें स्मरण कर लगता है कि मैं भी बन जाऊं सिपाही।

मेरा भी तन मन धन इस धरती पर न्योछावर है,
अंधेरों में यह दुनिया दिखती कितनी भयावह है।
मैंने भी इन अंधेरों में एक दीप जलानी चाही,
रोम रोम कहता है मेरा मैं भी बन जाऊं सिपाही।

लड़ते रहते वह अड-अड कर, जलते रहते वह तप-तप कर,
लेकर सौगंध इस मिट्टी का रक्षा करते वह सीमा पर।
फिर दिया लहू बलिदान मगर एक भी आंच ना आने पाई,
कहता है पुलकित रक्त मेरा मैं भी बन जाऊं सिपाही।

इन वीर सपूती शेरो ने एक दहाड ऐसा मारा था,
शासन करते गोरों के घर बच्चा बच्चा घबराया था।
जब किया शत्रु संघार सभी ने उनकी ना एक चलने पाई,
तब विजय तिलक कर वीरो संग हम सब ने आजादी पाई।
कर स्मरण यह लगता है, आजाद हिंद की सेवा में मैं भी बन जाऊं सिपाही।

जिस दिन मैं भी लड़ जाऊंगा, पत्थर बन कर अड जाऊंगा,
इस देश धर्म की रक्षा को हंसते-हंसते मर जाऊंगा।
होकर मिट्टी में दफन मेरी यह रूह बनेगी इसकी गवाही,
फक्र से मैं यह कहता हूं कि सबसे आगे है हर एक सिपाही।
रोम रोम कहता है मेरा मैं भी बन जाऊं सिपाही मैं भी बन जाऊं सिपाही।
जय हिंद जय भारत।

सतीश कुमार सोनी
जैतहरी जिला-अनूपपुर मध्य प्रदेश

Thursday, 23 April 2020

मेरे यार - सतीश कुमार सोनी




ये छोटी-छोटी खुशियो के बड़े-बड़े तोहफे, बस एक ही है मेरे यार। 
उसने की कभी मेरी बेइज्जती, तो हुई  उससे कभी तकरार। 
पर जो कम न हुआ वो है उनका प्यार,
ऐसे है  मेरे यार ऐसे है मेरे यार। 

फुरसत से मिले उस क्लासरूम में, याद है मुझे उनका इठलाना। 
करके मन भर बाते और जी भर चुगली,फिर कहते मत उसे बताना। 
छोटी खुशियों को बड़ा बनाना, रूठ के एक पल फिर खुद मान जाना। 
शायद ही हो कहीं ऐसा प्यार,
ऐसे है  मेरे यार ऐसे है मेरे यार।। ....  

वैसे तो हम एक  जान थे, पर करते न हम किसी का सम्मान थे। 
पर आती बात जब किसी एक पर, लड़ते थे हम बड़े शान से। 
कहा मिलेंगे ऐसे गहने, ऐ मेरे यार तेरे क्या कहने। 
सच है यार बिना जीवन बेकार, ऐसे है मेरे यार........  

याद है उन सबका यह कहना, कही भी रहेंगे मिलते रहना। 
चल दिए सभी फिर अपने सफर पर, कहकर मिलेंगे फिर इसी जगह पर। 
हो गए है अब वो दिन भी पुराने, बीते थे जो दिन वो सुहाने। 
न भूल सकेंगे हम कभी भी , चाहे बीते दिन भी हजार। 
ऐसे है मेरे यार ऐसे है मेरे यार।
मिस यू मेरे यार........ 

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                                                                                 ( गूगल से साभार )

सतीश कुमार सोनी 
जैतहरी जिला अनूपपुर(म० प्र०) 

Sunday, 19 April 2020

यादें- सतीश कुमार सोनी


writers picture

##यादें##


कुछ तो है बीते हुए कल में, 
बसी है यादें हर एक पल में। 
देकर नाम पुराने दिन का,
जीता हूं मैं उसी हलचल में।

 खोकर मन स्वप्न दिखा जाता है,
 बीते हुए पल की याद दिला जाता है।
 भूला नहीं इसे मै आज और कल में,
 कुछ तो है बीते हुए कल में,
 कुछ तो है बीते हुए पल में।। 

 अच्छी नयी-पुरानी यादें एक दिन सब धूमिल हो जाती हैं,
 ना जाने क्यों सारी बातें दिल में कहीं दब जाती हैं।
 लड़ते झगड़ते यारों के संग दिन और साल गुजर जाता है,
 देकर अपने याद सुहानी ना जाने कौन किधर जाता है।
  हम बनते बिगड़ते थे एक ही पल में,
  कुछ तो है बीते हुए कल में, कुछ तो है बीते हुए पल में।

किसी का रोना किसी का गाना, थोड़े-थोड़े में सब कह जाना।
लड़कर मनभर फिर उसे मनाना, सब कुछ याद बहुत आता है।
ऐसी मीठी मीठी यादों के संग जीवन का एक पन्ना और पलट जाता है।
देखे पलट कर जब हम इसको जीवन का एक चिट्ठा नजर आता है।
करते हैं हम याद इसे हर सुख-दुख के पल में,
कुछ तो है बीते हुए कल में, कुछ तो है बीते हुए पल में।।


सतीश कुमार सोनी
जैतहरी, जिला अनूपपुर म0प्र0

Saturday, 18 April 2020

मेरी मां - सतीश कुमार सोनी

मेरी मां

मेरे दिल में छुपी है एक बात,
जो मैं ना कह पाया दिन रात।
कि, मां मैं आपसे कितना प्यार करता हूं।।
मुझे सुलाने मुझे खिलाने जो जगती थी सारी रात,
उससे मैं ना कह पाया यह बात। 
कि, मां मैं आपसे कितना प्यार करता हूं।.....

तुमने कि मेरी हर जिद पूरी,
रखकर अपनी ख्वाहिश अधूरी।
चलती थी तुम मेरे साथ,
पर मैं ना कहा पाया यह बात।
कि, मां मैं आपसे कितना प्यार करता हूं।....


जब भी थी जरूरत तुम्हारी,
आप खड़ी थी मेरे साथ।
चाहे हो दिन का उजाला या हो आधी रात,
पर मैं ना कह पाया यह बात।
कि, मां मैं आपसे कितना प्यार करता हूं।....

मुझ को सही राह दिखाने जब भी उठाया है तुमने हाथ,
घर कर गई है दिल में यह बात।
ऐसा लगा जैसे मै पा लूंगा सारी कायनात,
पर मैं ना कह पाया यह बात।
कि, मां मैं आपसे कितना प्यार करता हूं।..........
मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं।...


     सतीश कुमार सोनी


जैतहरी जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश

Friday, 17 April 2020

मन की बात- सतीश कुमार सोनी






देख चिड़ियों का यह रैन बसेरा,

लगता है मुझको अपना ही डेरा।
इनको देख मन बड़ा मुस्काए,
काश! मुझको फिर से ऐसा बचपन मिल जाए।

चू-चू करके दाना खाती,

लगता है मुझे यही समझाती।
आंख खुले और झट उड़ जाए,
काश! मुझको फिर से ऐसा बचपन मिल
जाए।

चिड़ियों का यह देख हौसला,

मेरा मन मुझको यह बोला।
चल अब कुछ कर कर दिखलाएं,
सारे सपने सच कर जाएं।
काश! मुझको फिर से ऐसा बचपन मिल
जाए।..........

सतीश कुमार सोनी

जैतहरी (म.प्र.)

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